नापसंदगी/नफ़रत की प्रवृत्ति

एक ही टकराव के दोनों पक्ष "सच" की इतनी अलग-अलग कहानियाँ क्यों सुनाते हैं कि सुलह लगभग नामुमकिन हो जाती है? चार्ली मंगर का मानना था कि नफ़रत सिर्फ़ हमसे ग़लत काम नहीं करवाती, बल्कि उस इतिहास को ही फिर से लिख देती है जिसे हम सच मानते हैं।

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