तर्क का दुष्चक्र: जब कोई तर्क सिर्फ खुद को दोहराता है
एक तर्क देखने में पूरा लग सकता है, जिसमें आधार-वाक्य और निष्कर्ष दोनों करीने से मौजूद हों, लेकिन अगर आधार-वाक्य असल में निष्कर्ष ही है, बस अलग शब्दों में, तो वास्तव में कुछ भी सिद्ध नहीं हुआ है।
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