किराया-से-मालिकाना (रेंट-टू-ओन)
एक साधारण स्टोर में 300 डॉलर का टीवी, रेंट-टू-ओन ग्राहक को साप्ताहिक किस्तों में दो साल बाद 1,000 डॉलर से भी ज़्यादा में पड़ सकता है — यह अंतर अमेरिकी कानून-निर्माताओं ने बार-बार सीमित करने की कोशिश की, पर कभी पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए। रेंट-टू-ओन उस नाजुक रेखा पर खड़ा है, जहाँ एक तरफ बैंकों से न मिलने वाला मालिकाना हक आम लोगों तक पहुँचाया जाता है, और दूसरी तरफ उसी पहुँच की कमी को मुनाफे की मशीन में बदल दिया जाता है।
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